गड़बड़ घोटाला, कोरोना वैक्सीन के नाम पर बिना अनुमति बन रही आपकी Health ID? जानें पूरा माजरा

ई दिल्ली। कोरोनावायरस की दूसरी लहर को देखते हुए सरकार ने वैक्सीन प्रक्रिया तेजी से कर दी है। अब तक देश में करीबन 19 करोड़ से ज्यादा लोगों को वैक्सीन लग चुकी है। इस स्थिति में सभी को मिलजुल कर लड़ना है और एक दूसरी मदद के लिए तैयार रहना है, क्योंकि महामारी की दूसरी लहर काफी ज्यादा प्रभावशाली है। अब तक जिन नागरिकों ने कोरोना से बचाव के लिए वैक्सीन की पहली डोज ली है। उन्होंने अपने वैक्सीन सर्टिफिकेट पर एक यूनिक हेल्थ आईडी (UHID) या हेल्थ आईडी देखा होगा। अब तक भारत सरकार की इस पहल के बारे में बहुत ही कम लोगों को पता होगा और अब तक इसका उद्देश्य भी साफ नहीं था। अब पहचान का यह नया रूप लोगों के बीच भ्रम और चिंता का विषय बनता जा रहा है। सबसे ज्यादा लोगों को इस बात से हैरानी हो रही है कि उन्हें इसकी कोई जानकारी ही नहीं है कि यह आईडी कैसे बनी है। जब लोगों को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया कि उनकी बिना जानकारी के ही यह आईडी बनी है और लगातार ऐसी पोस्ट करने वाले यूजर्स की संख्या में इजाफा होता जा रहा है। उनके यही सवाल हैं कि UHID बिना जानकारी के प्रदान की गई थी। हालांकि, UHID भारत सरकार का नया कॉन्सेप्ट नहीं है, बल्कि इसे पहले कई मौकों पर उजागर किया गया है। यहां हम आपको बता रहे हैं कि सरकार के मुताबिक हेल्थ आईडी क्या है। हेल्थ आईडी भारत सरकार के नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन (NDHM) की एक पहल के तौर पर आई है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के मुताबिक, NDHM देश में डिजिटल हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर के इंटीग्रेशन को मजबूत बनाने के लिए उद्देश्य से काम करती है। साफ शब्दों में कहा जाए तो इस पहल के जरिए भारत में हेल्थ सर्विस को डिजिटल बनाना है। क्या है हेल्थ आईडी? देश में हेल्थ सर्विस के इंफ्रास्ट्रक्चर में डिजिटल सिस्टम को लाने का प्लान है। इन सिस्टम के जरिए एक साथ हेल्थ सर्विस, कर्मचारियों, हेल्थ रिकॉर्ड और मरीजों और उनकी हेल्थ हिस्ट्री को कवर किया जाएगा। NDHM की कार्य प्रणाली को चालू रखने के लिए काफी जरूरी सिस्टम है। NDHM वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक हेल्थ आईडी हेल्थ सर्विस प्रोवाइडर्स में किसी की पहचान को स्टैंडर्डाइज करने में मदद करेगी। कहा गया है कि यह चेक करने का इकलौत तरीका है कि तैयार किए गए मेडिकल रिकॉर्ड उचित व्यक्ति को जारी किए जा रहे हैं या नहीं। यह हेल्थ आईडी एक बार जेनरेट होती है और उसके बाद उसका इस्तेमाल खास तरीके से व्यक्तियों की पहचान करने के लिए किया जाता है। इसके जरिए ही उन्हें वेरिफाई किया जाएगा और उनके हेल्थ रिकॉर्ड को कई सिस्टम और स्टेकहोल्डर तक वितरित किया जाएगा। साफ शब्दों में कहें तो हेल्थ आईडी सभी लोगों के लिए हर जगह और हेल्थ सर्विस में हेल्थ रिकॉर्ड रखने के लिए तरीका होगा। माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर इस मुद्दे को लेकर कई ट्वीट्स किए गए हैं, जिससे यह साफ होता है कि वैक्सीन लगवाने वालों में से किसी के भी पास UHID नहीं थी। वहीं, अगर आप NDHM वेबसाइट पर जाकर एक हेल्थ आईडी बनाने की कोशिश करेंगे तो आपको यह रिस्पॉन्स मिलेगा- वर्तमान में हेल्थ आईडी सिर्फ अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव, लद्दाख, लक्षद्वीप और पुडुचेरी में ही बन सकती है। इसके यह साफ होता है कि अगर देश का कोई नागरिक अन्य हिस्सों में एक हेल्थ आईडी बनाने की कोशिश भी करेगा तो यह मुमकिन नहीं हो पाएगा। वहीं, वैक्सीन रजिस्ट्रेशन के लिए उपयोग किए जा रहे पोर्टल के अलावा कहीं से भी UHID प्राप्त नहीं की जा सकती है। यानी कि यह साफ है कि फिलहाल कोविड -19 वैक्सीनेशन अभियान ही इकलौता तरीका है, जिससे अब तक हेल्थ आईडी बन रही है। MoHFW की वेबसाइट पर FAQ पेज से पता चलता है कि पब्लिक हॉस्पिटल, कम्युनिटी हेल्थ सेंटर, भारत के हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर और नेशनल हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर रजिस्ट्री में आने वाला कोई भी हेल्थ केयर प्रोवाइडर यूजर्स की हेल्थ आईडी के जरिए सपोर्ट कर पाएगा। भारत में महामारी के बाद से वैक्सीनेशन सेंटर बनाए गए हैं, जहां पर वैक्सीन डोज लेने वालों की उपलब्ध जानकारी के जरिए हेल्थ आईडी तैयार की जा रही हैं। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या इस हेल्थ आईडी को जारी करने के दौरान यूजर्स से पूछा गया था। सोशल मीडिया पर एक भी यूजर ने इसके लिए हामी नहीं भरी है, सभी का यही कहना है कि उन्हें इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। अगर आपने भी पहली बार वैक्सीन लगवाने के बाद वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट पर हेल्थ आईडी को देखा है तो इसकी संभावना है कि यह आईडी वैक्सीन सेंटर पर डोज लगवाने के दौरान ही बनी है। MoHFW की वेबसाइट के मुताबिक हेल्थ आईडी के रजिस्ट्रेशन के लिए नाम, जन्मतिथि, लिंग, मोबाइल नंबर और ईमेल की जरूरत होती है। ध्यान देना चाहिए कि MoHFW वेबसाइट के हिसाब से हेल्थ आईडी के लिए आधार अनिवार्य नहीं है। हेल्थ आईडी के लिए आधार देना या नहीं देना यूजर पर निर्भर करता है। इससे यह साफ होता है कि लोग डिजिटली वेरीफाई मोबाइल नंबर या ईमेल आईडी के साथ अपनी बेसिक डेमोग्राफिक जानकारी का इस्तेमाल करके अपना हेल्थ अकाउंट बना सकते हैं। हालांकि, इस दौरान वैक्सीन सेंटर पर लोगों से वैक्सीन के समय अपना आधार कार्ड लाने के लिए बाध्य किया गया जबकि उन्होंने एक अलग आइडेंटिफिकेशन का इस्तेमाल करके CoWin पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करवाया था। काफी जगह वैक्सीन सेंटर पर आधार की जानकारी साझा करने के लिए कहा गया है।


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