अब सोशल मीडिया और OTT प्लेटफॉर्म की नहीं चलेगी मनमानी, सरकार को देना होगा जवाब

भारत में सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए नई गाइडलाइंस जारी की है, इसको लेकर में सरकार लंबे समय से काम कर रही थी कि दशकों पुराने इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट () में संशोधन किया जाए और अब आखिरकार नया एक्ट आ गया है। केंद्र सरकार ने आज बिलकुल नए कोड ऑफ एथिक्स पेश किए हैं, जिनमें ऑनलाइन कंटेट को लेकर नए नियम और कानून बनाए गए हैं, जिनमें विशेष सावधानी बरती जाएगी। अब सोशल मीडिया और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर किस प्रकार कंटेंट जाएगा इसके लिए गाइडलाइन्स जारी कर दी गई हैं। केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद और केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने मिलकर गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में नए डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड की घोषणा की। सोशल मीडिया कंटेंट को रेगुलेट करने के लिए बनाए गए नए नियमों के तौर पर काम नई चीजें लागू होंगी। सरकार ने यूजर्स के स्वैच्छिक वेरिफिकेशन, अनुपालन अधिकारी और शिकायत अधिकारी का भी प्रस्ताव किया है। इसके अलावा सरकार ने 24 घंटे और सातों दिन कॉन्टेक्ट करने के लिए अधिकारी नियुक्त करने के लिए भी कहा है। कानून प्रवर्तन एजेंसियों और अधिकारियों के साथ 24 घंटे और सातों दिन कॉर्डिनेट करने के लिए एक नोडल पर्सन नियुक्त किया जाए। वह व्यक्ति कानून या नियमों के अनुसार किए गए उनके आदेशों या जरूरतों के हिसाब से काम करेगा। बिलकुल नए इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी नियम 2021 सोशल मीडिया और स्ट्रीमिंग सर्विस को एक रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के तहत लाएगा। नए नियमों में डिजिटल और ऑनलाइन मीडिया सेफ्टी के तहत काम करेंगी। अब अगर किसी सोशल मीडिया जैसे फेसबुक या ट्विटर पर कोई आपत्तिजनक कंटेट डाला जाता है तो उसे सरकारी आदेश के बाद 24 घंटे की समय सीमा में हटाना है। केंद्र सरकार ने कंप्लेंट का समाधान निकालने के लिए एक थ्री-टियर रेगुलेटरी फ्रेमवर्क तैयार किया है। थ्री-टियर स्ट्रक्चर (लेवल 1) एप्लिकेबल एंटीटी द्वारा सेल्फ रेगुलेशन (लेवल 2) एप्लिकेबल एंटीटी की सेल्फ-रेगुलेटिंग बॉडी का सेल्फ रेगुलेशन (लेवल 3) केंद्र सरकार द्वारा ओवरसीज मैकेनिज्म। ऐसा कंटेंट जो कि देश की संप्रभुता और अखंडता को प्रभावित करता है, ऐसा कंटेंट जो कि राज्य की सुरक्षा के लिए खतरा या धमकी भरा है, ऐसा कंटेंट जो कि भारत के मित्र देशों के संबंध के लिए हानिकारक है उसे नहीं दिखाया जा सकता है। सरकार के नए कानून ऑनलाइन कंटेंट प्लटफॉर्म्स को सावधान करते हैं कि वह देश की संप्रभुता और अखंडता को प्रभावित नहीं करें। अब यूजर्स को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स बताएंगे कि इस प्रकार की सामग्री को होस्ट, मॉडिफाई, डिस्प्ले, अपलोड, पब्लिश, अपडेट, शेयर या सेव नहीं कर सकते जो कि झूठी या फिर अफवाह फैला रही है। साथ ही यूजर्स ऐसी कोई भी जानकारी साझा नहीं करेंगे जो कि नाबालिगों के लिए सही नहीं है। अगर कोई भी कंपनी इन बातों को नहीं मानेगी तो यह कानून का उल्लंघन होगा।


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